इस्लामाबाद. लाहौर हाईकोर्ट ने सोमवार को पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ की मौत की सजा माफ कर दी। हाईकोर्ट ने उनकी सजा माफ करते हुए कहा कि इस मामले में विशेष अदालत का फैसला असंवैधानिक है। उन्हें विशेष अदालत ने संविधान को स्थगित कर इमरजेंसी लागू करने के मामले में 17 दिसंबर को मौत की सजा सुनाई थी।
लाहौर हाईकोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति की मौत की सजा माफ करते हुए कहा- मुशर्रफ के खिलाफ स्पेशल ट्रिब्यूनल का फैसला अंवैधानिक है। उनके खिलाफ दर्ज केस और अभियोजन की दलीलें गैरकानूनी है। इसके बाद हाईकोर्ट ने विशेष अदालत का फैसला पलट दिया। मुशर्रफ के वकीलों ने विशेष अदालत से मौत की सजा मिलने के बाद लाहौर हाईकोर्ट में अपील की थी।
संविधान स्थगित कर इमरजेंसी लागू की
मुशर्रफ ने 3 नवंबर 2007 में संविधान को स्थगित कर इमरजेंसी लागू कर दी थी। इसके बाद उन्होंने 1999 से 2008 तक पाकिस्तान में शासन किया। इस मामले में उनके खिलाफ दिसंबर 2013 में सुनवाई शुरू हुई। मार्च 2014 में उन्हें देशद्रोह का दोषी पाया गया। हालांकि, अलग-अलग अपीलीय फोरम में मामला चलने की वजह से मामला टलता चला गया। मुशर्रफ ने धीमी न्याय प्रक्रिया का फायदा उठाते हुए मार्च 2016 में पाकिस्तान छोड़ दिया और दुबई चले गए। मुशर्रफ तब से दुबई में ही हैं और गंभीर रूप से बीमार होने के कारण उनका इलाज चल रहा है।
मुशर्रफ ने सजा को गलत बताया था
पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान के पहले सैन्य शासक हैं, जिनके खिलाफ कोर्ट में मामला चलाया गया। फांसी की सजा दिए जाने के बाद 18 दिसंबर को उन्होंने एक वीडियो जारी किया था। इसमें मुशर्रफ ने अस्पताल के बिस्तर पर लेटे-लेटे कहा, “देशद्रोह का केस बेबुनियाद है। गद्दारी छोड़िए, मैंने तो इस मुल्क की कई बार खिदमत की है। कई बार जंग लड़ी। 10 साल तक सेवा की। आज मेरी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मेरे खिलाफ जांच के लिए कमीशन बनाया गया। बेशक बनाइए। लेकिन, इस कमीशन को यहां आकर मेरी तबियत देखें और बयान दर्ज करें। इसके बाद कोई कार्रवाई की जाए। कमीशन की बात कोर्ट भी सुने। उम्मीद है कि मुझे इंसाफ मिलेगा।”