नईदिल्ली. इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर्स ने रविवार को कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे हॉस्पिटल्स पर फूल बरसाए थे। ऐसा स्वास्थ्यकर्मियों, नर्सों, डॉक्टरों और उन सभी का हौसला बढ़ानें के लिए किया गया था, जो कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। साथ ही उन्हें ये संदेश भी देना कि फोर्स उनके साथ है। इस इवेंट के बाद से सोशल मीडिया पर एक फोटो काफी वायरल हो रही है। इसमें खाली सड़क पर कुछ मजदूर अपने सामान के साथ जाते दिख रहे हैं वहीं उनके पीछे एयरफोर्स के विमान को फूल बरसाते दिखाया जा रहा है। पड़ताल में वायरल फोटो की सच्चाई सामने आई।

वायरल पिक्चर के साथ दिए कैप्शन में लिखा है कि, ‘कहा जाता है कि एक फोटो हजारों शब्दों के बराबर होती है। यह एक लाख की कीमत की है। मुझे नहीं पता किसने इसे क्लिक किया लेकिन 2020 के हर पहलू को एक ही फ्रेम में कैप्चर करने के लिए फोटोग्राफर पुरस्कार का हकदार है। इतिहास इस तरह के चित्रों से बना है।’
क्या है सच्चाई
- जब इस फोटो की हमने रिवर्स सर्चिंग की तो पता चला कि यह दोनों अलग-अलग फोटोज हैं, जिन्हें मिलाकर एक फोटो बनाई गई है।
- हेलीकॉप्टर से फूल बरसाती फोटो हमें हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित मिली। इसमें बताया गया था कि, मुंबई में कोविड-19 वॉरियर्स को आईएएफ ने सैल्यूट दिया।

- इस फोटो को सर्च करने पर पता चला कि यह फोटो अभी की नहीं बल्कि 2018 की है। इसे अनुपम नाथ नाम के फोटोग्राफर ने एसोसिएटेड प्रेस के लिए क्लिक किया था।
- एपी इमेजेस पर इसे 26 जनवरी 2018 को अपलोड किया गया था। यहां दी गई जानकारी के मुताबिक, यह फोटो गुवाहाटी की है। तब इंडियन एयरफोर्स के विमान ने रिपब्लिक डे के मौके पर फूल बरसाए थे।

- वहीं माइग्रेंट वर्कर वाली फोटो हमें एनडीटीवी के आर्टिकल में मिली। इस फोटो को 19 अप्रैल को प्रकाशित किया गया था।
- दोनों फोटो को देखकर पता चलता है कि इन्हें मर्ज करके वायरल तस्वीर बनाई गई है।

निष्कर्ष : पड़ताल से स्पष्ट होता है कि फोटोशॉप्ड इमेज को वायरल कर दावा किया गया है कि एयरफोर्स हेलीकॉप्टर द्वारा माइग्रेंट वर्कर्स पर फूल बरसाए गए।