एजुकेशन डेस्क. स्कूल शिक्षा विभाग भले ही दावे करे, लेकिन 90% नामांकन के बाद भी भोपाल में पहली कक्षा के 90% बच्चे शब्द तक नहीं पढ़ पाते, जबकि तीसरी के 75% बच्चे पहली कक्षा के स्तर का भी पाठ नहीं पढ़ सकते। यह खुलासा असर की गुरुवार को जारी रिपोर्ट में हुआ है। गौरतलब है कि देश में बच्चों की शिक्षा की दशा-दिशा का जायजा लेने वाली वार्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट असर 2019 अर्ली इयर्स गुरुवार को जारी की गई है। असर ने ग्रामीण भारत के 3 से 16 आयु वर्ग के स्कूलों में नामांकन की स्थिति और 5 से 16 आयु वर्ग के बच्चों की बुनियादी पढ़ाई और गणित की क्षमता पर रिपोर्ट जारी की है। 2019 में असर छोटे बच्चों पर केंद्रित है। मप्र में भोपाल व सतना जिले में सर्वे किया गया है।
चार साल के बच्चों का स्कूल में नामांकन तक नहीं
चार साल उम्र के भोपाल में 17.9% और सतना में 17.2% बच्चे किसी भी तरह के प्री स्कूल या स्कूल में नामांकित नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार लड़के निजी व लड़कियां सरकारी संस्थाओं में ज्यादा हैं। 4 व 5 वर्ष के बच्चों में से 56.8% लड़कियां व 50.4% लड़के सरकारी प्राथमिक या प्राथमिक स्कूल में नामांकित हैं, जबकि 43.2% लड़कियां और 49.6% लड़के निजी प्राथमिक या प्राथमिक स्कूल में नामांकित हैं। गौरतलब है कि असर एक वार्षिक सर्वेक्षण है, जिसका उद्देश्य भारत में प्रत्येक राज्य और जिलों के बच्चों की स्कूली शिक्षा की स्थिति और बुनियादी शिक्षा के स्तर का विश्वसनीय वार्षिक अनुमान प्रदान करना है। यह आम लोगों द्वारा किया जाने वाला देश का सबसे बड़ा सर्वेक्षण है। साथ ही यह देश में बच्चों की शिक्षा के परिणामों के बारे में जानकारी का मुख्य वार्षिक स्रोत भी है।